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प्रियंका दुबे 'प्रबोधिनी'

Children Stories

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प्रियंका दुबे 'प्रबोधिनी'

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"मुझे बचालो मेरे पापा"

"मुझे बचालो मेरे पापा"

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मुझे बचालो मेरे पापा

मैं तेरे दिल का टुकड़ा हूँ।

मम्मा का बचपन है मुझमें,

उसका ही सुंदर मुखड़ा हूँ।


एक रोज़ बड़ी हो जाऊँगी

सपनों में मैं खो जाऊँगी।

तुम नाज़ करोगे मुझपर तब

वो दिन आयेगा कैसे कब?


जब बिन जन्मे मर जाऊँगी

तब क्या? कुछ मैं कर पाऊँगी?

इक रोज़ तुम्हारे आँगन के

बगिया के फूल खिलाऊँगी।


इक बार मुझे तुम देखोगे

खुद को कैसे फिर रोकोगे।

इस बार रोक लो जाने से

सुन लो मेरी भी मनाने से।

मेरी धड़कन महसूस करो

मुझको पापा महफूज़ करो।


मत कहो कि मैं भी उखड़ा हूँ

मैं तेरे दिल का टुकड़ा हूँ।।


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