Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra
Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra

ये नजर है

ये नजर है

1 min 199 1 min 199

उठी जो तुम्हारी तरफ ये नज़र है,

कि नज़रे इनायत मेरी रहगुज़र है।


नज़र जो मिलाओ तो ये ध्यान रखना,

सभी को हमारी तुम्हारी ख़बर है।


वही रासता है वही सख़्त मंजिल,

कि डरते थे हम हो गये अब निडर है।


हँसी वादियों में तेरा हाथ थामे,

चले संग कितना सुहाना सफ़र है।


जमी पर खड़ी पाँव जड़ से जमाये,

पकड़ कामयाबी को चढ़ती शिखर है।


उधर जल रही है गरीबों की बस्ती,

इधर यार मस्ती में डूबा शहर है।


असर जिस शमां पे हवाओ ने डाला,

कि जलती रही वह शमां बेअसर है।


बहुत हो गया बेवजह रूठ जाना,

मनाता नहीं अब मेरा हमसफर है।


Rate this content
Log in

More hindi poem from प्रियंका दुबे 'प्रबोधिनी'

Similar hindi poem from Abstract