STORYMIRROR

jagjit singh

Abstract

3  

jagjit singh

Abstract

दिगंबर

दिगंबर

1 min
205

आप किसी को भी मना नहीं करते हो,.... 

यहां तो, किसी, साब लोगों को मिलने के लिए ,...

हफ्तों पहले से, नाम दर्ज कराना पड़ता है, मगर, आप के पास, 

कोई भी आ सकता है ,...... 

ये नहीं देखते हो,..... आप को चाहा या ना चाहा,..... 

सूट, बूट, वाले हो, जीन्स वाले हो,...... 

आप का सामने सारे कर्नल, जरनैल अपना ठांट बाट, से आते और सर झुकाते हैं .....,

देखो तो,..... वो फिल्म वाले, ये अन्तरराष्ट्रीय व्यापारी

ऐसी क्या बात है, आप मे,...., आप को, ..... 

कोई देखा तक नहीं,....... 

आप दिगंबर हो,..... मतलब, ये हुआ,..... कि अम्बर, आप का, वस्त्र, कपड़ा बना है,...... वह, साब, आप तो, बड़ा अमीर निकले,........ 

ओहो, समझा,.... लोग सिर्फ,... 

धनी को ही सलाम करते हैं,......., 

चलो, इसी बात पे सही, झुकते तो है,...... 

वाह भाई, ... मेरा भी एक यार है जो इतना अमीर है, कि , वो......... अम्बर को लपेट के घूमता है,. 

आप का नाम है,......... खैर,छोड़ो , नाम से क्या मतलब, जो मेरा नाम है वहीं आप का...... . 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract