STORYMIRROR

jagjit singh

Others

2  

jagjit singh

Others

कुछ यूं ही

कुछ यूं ही

1 min
16

जब दिल थम सा जाता है,  

जब आगे का रास्ता नहीं दिखता है,

जीने की इच्छा सुन्न हो जाती है, 


पता नहीं जीते तो आ रहा हूँ,  

आंसुओं से प्यास बुझाते, 


ऐसा ही होता है ना लाश बनी जिंदगी का, 


रहम की बात नहीं,  

इनसानियत के नाते, छोड़ देते,  जी लेते। 



Rate this content
Log in