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Kanchan Prabha

Classics Fantasy Children

4  

Kanchan Prabha

Classics Fantasy Children

गाँव का मेला

गाँव का मेला

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गाँव मे आज मेला लगा था

सब्जी की बाजार सजी थी

फल भी सुंदर-सुंदर सजे थे 

मंडी में खूब चहल-पहल थी।


गाँव में आज मेला लगा था

फूलों से दूकान सजे थे

हलवाई के पकवान सजे थे

बच्चे झूल रहे थे झूले!


गाँव मे आज मेला लगा था

मेले में चूड़ी बिन्दीया सजी थी

लटकन मटकन चमक रही थी

युवा युवती घूम रहे थे।


गाँव मे आज मेला लगा था

पक्षी तोते बिक रहे थे

मोटे मोटे बैल बँधे थे

खूब कमाई हो रही थी।


गाँव मे आज मेला लगा था

हम भी सज धज गये घूमने

दादी,दादा, दीदी, भैया

मम्मी-पापा भी संग चले थे।


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