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Alka Nigam

Romance

4  

Alka Nigam

Romance

एक रंग प्यार का

एक रंग प्यार का

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इक रंग प्यार का.....

तेरी सुरमई सी आँखों का

जो याद में मेरी अक्सर

घुल घुल सा जाता था।


इक रंग प्यार का.....

तेरी बिंदिया की लाली का

जो रोज़ उतर तेरे माथे से 

मेरे काँधे पे नज़र आता था।


इक रंग प्यार का.....

तेरी मांग का वो सिंदूरी

जो सीने पे मेरे अक्सर

छाप छोड़ जाता था।


इक रंग प्यार का.....

टेसू से तेरे गालों का

जो देख मुझे लज्जा से

रक्ताभ से हो जाते थे।


इक रंग प्यार का.....

तेरे हाँथों की मेहंदी का

जो मेरे नाम से रच कर

गहरा हो जाता था।


इक रंग प्यार का.....

गुलकन्द सा तेरे अधरों का

जो नाम मेरा लेने पे

लरज लरज जाते थे।


इक रंग प्यार का.....

तेरे कुमकुम से रंगे पैरों का

जो छाप छोड़ जाते थे

मेरे मन के आँगन में।


और.....

एक महक तेरी चम्पई सी,

जो बिखर बिखर जाती है

तेरे बिन मेरी रातों में।

महका देती है तन मन

घुल के मेरी साँसों में।




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