एक पिता का दर्द
एक पिता का दर्द
हां ये मेरा बेटा है जिसको मैंने पाला था
अपने खून से इसको मैने सींचा था ।
मन्नते माना था ईश्वर से इसके खातिर
तब जाकर ये हमारे जीवन में आया था।।
तब मैंने नही सोचा था कि
मेरे बनाए घर में मुझे आने से रोक देगा ।
बड़ा होकर मुझे ही अपने घर से निकलकर
वृद्धा आश्रम में फेंक देगा ।।
तब मैंने नही सोचा था कि
जिसके लिए अपना खून जलाकर।
तिनका तिनका जोड रहा हूं
वही मेरा खून वृद्धा आश्रम छोड़ देगा।
तब मैंने नही सोचा था कि
जिसे पढ़ा लिखा कर बड़ा आदमी
बना रहा हूं
वही मुझे जलील करके वृद्धा आश्रम में
फेक देगा।
क्या गलती मेरी जो इसे पढ़ाया लिखाया
क्या गलती मेरी है जो कमाया इसे लुटाया
क्या गलती मेरी है जो खुद भूखा रहकर इसे खिलाया
क्या गलती मेरी है जो खुद फटे कपड़े पहना
और इसे अच्छा अच्छा कपड़ा पहनाया ।।
क्या गलती मेरी है जो अपनी अरमानों का गला घोट दिया
क्या गलती मेरी है जो इसके हरेक सपनो को पूरा मैने किया
और और और इसने इसने मुझे वृद्धा आश्रम में छोड़ दिया।
अच्छा सिला दिया तूने मुझे एक पिता होने का
अच्छा फर्ज निभाया तूने एक बेटा होने का
तुम्हारी मां भी उप्पर से देख रही होगी
तो आज वो भी रो रही होगी।
तुम्हारी छोटी सी दर्द से हमारा शरीर सिहर जाता था
जब तुम्हे बुखार होती थी तो सीने से लगाकर
रात भर खुद जागकर तुम्हें सुलाता था
अच्छा सिला दिया है बेटे तुमने
घर का एक कोना ही तो मांगा था मैने
अपने यादों के सहारे जी लेता
वो यादें भी छीन लिया तुमने ।।
अंतिम सांसे जब गिनूंगा तब आ जाना
कम से कम मेरी अर्थी को कंधा लगा जाना।
अंतिम इच्छा पूरी कर देना
और एक बेटे का फर्ज निभा देना।।
हे ईश्वर अगले जन्म में पिता मत बनाना
बस इतना धन देना की
वृद्धा आश्रम बना सकूं
इस जन्म का कर्ज
अगले जन्म ने लौटा सकूं।
