जिंदगी का पहला अनुभव
जिंदगी का पहला अनुभव
माना कि मैं भी परेशान हूँ,
मैं तो खुदी से भी हैरान हूँ।
ज्वारों का अंदर समंदर बसा है,
छोड़ा है फिर भी धागा कसा है ।।१
मेरे लिए न कोई अपना पराया,
जो भी मिला मैंने रिश्ता बनाया।
वैसे मुझे चीजें कम ही हैं भाती,
जाती न जल्दी जो भी हैं आती ।।२
वैसे तो मैं थोड़ा कम बोलता हूँ,
राज़ को अपने नहीं खोलता हूँ ।
दफ़न हैं हजारों अनकही कहानी,
अलग है कठिन हैं ये जिंदगानी ।।३
मेरे भी किस्से कहानी अनोखे,
मेरे भी जीवन में आये हैं झोखे ।
जले हैं अगन से तो तपना है सीखा,
हुए हैं परेशां तो चलना है सीखा ।।४
मैंने किसी को एक वादा किया है,
मिलने का उसको इरादा किया है ।
चाहत को अपनी समेटे हुए हूँ,
उसी का मैं दामन लपेटे हुए हूँ ।।५
पहली मुलाकात अच्छी न जाती,
न मैं सोच पता न वो सोच पाती।
ख्वावों में उसके डूबा हुआ हूँ,
यादों मैं उसकी खोया हुआ हूँ ।।६
माना कि मैं भी परेशान हूँ,
मैं तो खुदी से भी हैरान हूँ।।
