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PANKAJ SAHANI

Tragedy Classics Fantasy

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PANKAJ SAHANI

Tragedy Classics Fantasy

खामोशियां

खामोशियां

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खामोश हूँ मै,

तुम्हे खामोशी सताये,

इस मायूसी का कारण,

मेरे यारो से पूछ लो !


खुद को बचाते हो,

बनाकर सता दुसासन का

क्या होता है मातम,

इन परिवारो से पूछ लो !


सब खुशिया मनाये,

पटाखे उडाये,

कैसी मनी दिवाली मेरी,

इन धधकते त्यौहारों से पूछ लो !


तुम पूछते हो देखकर,

दर्दे-ऐ-हालात मेरा,

कभी हाल-ऐ-दिल,

इन लचार बीमारो से पूछ लो !


नजरें टिकाये है,

कलेंडर के पन्नो पर,

क्या ढूढते है शाम को,

इन बेसहारो से पूछ लो


जो यादो मे आते है,

एक सुबह सा बनकर,

कब आयेंगें लौट कर,

इन गुमराहो से पूछ लो,


मैं भी आम हूँ,

दर-बदर भटकता इंसान,

यकी नहीं तो मेरे घर के,

दीवारों से पूछ लो !


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