STORYMIRROR

V. Aaradhyaa

Drama Tragedy Fantasy

4  

V. Aaradhyaa

Drama Tragedy Fantasy

एक रहगुजर हो

एक रहगुजर हो

1 min
11

किसी बात का ग़म इधर भी नहीं है, 

मेरा अब कोई हमसफ़र भी नहीं है।


दुआएं झोली में समेटे बढ़े जा रहे हैं 

कोई और अब रहगुज़र भी नहीं है।


किसी बात का ग़म इधर भी नहीं है, 

मेरा अब कोई हमसफ़र भी नहीं है।


सहें क्या सितम हैं ज़माने में हमने, 

मेरे यार को तो ख़बर भी नहीं है।


दुआएं झोली में समेटे बढ़े जा रहे हैं 

कोई और अब रहगुज़र भी नहीं है।


किसी बात का ग़म इधर भी नहीं है, 

मेरा अब कोई हमसफ़र भी नहीं है।


जो आए थे देने मिलन की नसीहत,

उन्हीं का यहां एक घर भी नहीं है।


किसी बात का ग़म इधर भी नहीं है, 

मेरा अब कोई हमसफ़र भी नहीं है।


ख़ुदा जान ले साथी जो हर किसी को,

सिवा मेरे दिल के किधर भी नहीं है।


किसी बात का ग़म इधर भी नहीं है, 

मेरा अब कोई हमसफ़र भी नहीं है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama