STORYMIRROR

Ruchi Mittal

Tragedy

4  

Ruchi Mittal

Tragedy

एक और निर्भया चली गई

एक और निर्भया चली गई

1 min
709

एक बार मोमबत्ती की जगह आरोपी को ही

जलाकर देख लो शायद बेटियाँ ही सुरक्षित हो जाये


एक और “निर्भया" चली गई

बनकर अखबारों की सुर्खियाँ,

दे गई मुद्दा,न्यूज़ चैनलों को बहस का,

चर्चाएँ होंगी,एक-दूसरे पर होंगे आरोप-प्रत्यारोप,

हर किसी की होगी,अपने को श्रेष्ठ दिखाने की होड़।


परंतु होगा क्या उससे ?

क्या वह बेटी वापस आ पाएगी ?

क्या आगे और कोई निर्भया बनने से बच पाएँगी ?


कितने संवेदनहीन हो गए हैं हम,

नारेबाजी, चर्चाएँ, धरने और कैंडल मार्च,

फिर कुछ दिनों बाद सब मौन

इंतजार में एक और निर्भया के।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy