STORYMIRROR

शशि कांत श्रीवास्तव

Romance

3  

शशि कांत श्रीवास्तव

Romance

एक अहसास

एक अहसास

1 min
431

आता हूँ रोज पास तुम्हारे 

जहाँ तुम उस रोज समाहित हुई थी 

पंचतत्व में मिल चिता की अग्नि संग 

इस आस में कि कहीं तुम आकर ....

लौट न जाओ,

इस एक अहसास की अनुभूति को 

करके महसूस आता हूँ रोज पास तुम्हारे ,

तभी, हवा का तेज झोंका महसूस करता हूँ 

पास अपने 

जिसमें घुली हुई थी वही मादक सी सुगंध 

लगा कि तुम पास मेरे हो आस पास यहीं 

पर, यह भ्रम था क्योंकि 

चिताओं के जलने से फैले धुएँ की महक थी 

फिर भी,

आता हूँ रोज पास तुम्हारे मिलन की आस में


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance