STORYMIRROR

Deepak Meena

Romance

4  

Deepak Meena

Romance

रंग

रंग

1 min
435

जीवन का हर एक चित्र

जब श्वेत श्याम था

ना जीवन में रंग था

ना रंगो का नाम था


बेरंग गगन था बेरंग धरा

बेरंग शहर की हर एक गली

बेरंग तितलियां बेरंग विहग

बेरंग बाग की हर एक कली


तब बनकर चितेरी तुमने

जीवन में इंद्रधनुष सा लाया था

लाल हरा नीला पीला

हर एक रंग खिल आया था


अब हर एक चित्र सतरंगी है

ना रही रंगो से कोई दूरी

हर सुबह सुनहरी है मेरी

हर शाम है मेरी सिंदूरी 


फ़िजा में रंग बिखरा हो अब

जब भी तू मेरे साथ चले

हो जीवन की हर सुबह साथ

तेरे संग ही हर शाम ढले।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance