Jalpa lalani 'Zoya'
Tragedy Inspirational Others
जब से दर्द भी मुझे चाहने है लगा
तब से दर्द से भी ख़फ़ा होती हूँ मैं
अब तूने भी सताना छोड़ ही दिया
बता ऐ दर्द! क्या तुझसे जुदा हूँ मैं?
ऐ दर्द! तुझे ही मेरे दिल में है बसाया
फिर मत कहना तू..कि बेवफ़ा हूँ मैं।
किताब-ए-ज़िन्द...
राब्ता
तिश्नगी-ए-क़ुर...
दिलनशीं
चाहत तेरी
पास आओ कभी
ज़ुल्फ़ का साया
हमसा कहाँ मिल...
तू है गीत मेर...
नाउम्मीदी में...
तेरे लंबे बाल और गुलपोशी के चर्चे हर जगह थे खुबसूरती बेहद थी तुझमें पर पहरे हर जगह थे. तेरे लंबे बाल और गुलपोशी के चर्चे हर जगह थे खुबसूरती बेहद थी तुझमें पर पहरे ह...
बस जन्म जहाँ परिचायक हो, फिर चाहे योग्य या नालायक हो। बस जन्म जहाँ परिचायक हो, फिर चाहे योग्य या नालायक हो।
वो सुबह कुछ अलग सी थी कुछ धुआं रेत बारीक सी थी। वो सुबह कुछ अलग सी थी कुछ धुआं रेत बारीक सी थी।
कुछ टूट रहा था, कुछ छूट रहा था, लेखन से नाता टूट रहा था। कुछ टूट रहा था, कुछ छूट रहा था, लेखन से नाता टूट रहा था।
संसद में हो या गलियों में, नारी का अपमान गलत है । संसद में हो या गलियों में, नारी का अपमान गलत है ।
गाँव की गलियों से जब जब गुजरा हूँ मैं पथ की बेरियों को उकेरा है मैंने। गाँव की गलियों से जब जब गुजरा हूँ मैं पथ की बेरियों को उकेरा है मैंने।
मैं तो एक वैश्या हूं, और वैश्या ही कहलाऊंगी जिस्म बेचकर ही, खुद को जिन्दा रख पाऊंगी। मैं तो एक वैश्या हूं, और वैश्या ही कहलाऊंगी जिस्म बेचकर ही, खुद को जिन्दा रख ...
अपना पट शीघ्र न खोलूँगी कुछ मुझको तो मनाये वो अपना पट शीघ्र न खोलूँगी कुछ मुझको तो मनाये वो
अपने घर का हाल देखकर,चुप रहना मत रोना अम्मा । अपने घर का हाल देखकर,चुप रहना मत रोना अम्मा ।
जिंदगी में भरी निराशाओं में एक नई आशा का उजाला दिखा तो था। जिंदगी में भरी निराशाओं में एक नई आशा का उजाला दिखा तो था।
'जीवधारी देश', ख़ुद को मानते हैं राज, सत्ता सब बदलना चाहते हैं। 'जीवधारी देश', ख़ुद को मानते हैं राज, सत्ता सब बदलना चाहते हैं।
घर घर जाके सबको हम सपना यही दिखाएंगे अच्छे दिन आएँगे, अच्छे दिन आएँगे। घर घर जाके सबको हम सपना यही दिखाएंगे अच्छे दिन आएँगे, अच्छे दिन आएँगे।
दूर कहीं दिख रहा था एक अस्थि पिंजर, जिस पर रह गया था बस मॉंस चिपक कर। दूर कहीं दिख रहा था एक अस्थि पिंजर, जिस पर रह गया था बस मॉंस चिपक कर।
छाती से चिपकाकर सुधियाँ पीड़ाओं ने लोरी गायी ! छाती से चिपकाकर सुधियाँ पीड़ाओं ने लोरी गायी !
तथा स्क्रीन पर आ गए भगत, सुभाष और अन्य वीर क्रांतिकारी। तथा स्क्रीन पर आ गए भगत, सुभाष और अन्य वीर क्रांतिकारी।
पराई भाषा को दिया मान,, अपनी भाषा को माना कूड़ेदान। पराई भाषा को दिया मान,, अपनी भाषा को माना कूड़ेदान।
मेरे हिंदू मुस्लिम बच्चों को आपस में लड़ाया जाता है मेरे हिंदू मुस्लिम बच्चों को आपस में लड़ाया जाता है
कुछ भी करें आज़ाद है अब तो हम, अधिकार ही हैं,फर्ज़ कहाँ मानते हैं। कुछ भी करें आज़ाद है अब तो हम, अधिकार ही हैं,फर्ज़ कहाँ मानते हैं।
औंधी पड़ी हुई धरती पर, निपट अभागिन छाँव। औंधी पड़ी हुई धरती पर, निपट अभागिन छाँव।
आज फिर तेरे तसव्वुर ने नींद को इन आँखों से रूख़्स्त किया है। आज फिर तेरे तसव्वुर ने नींद को इन आँखों से रूख़्स्त किया है।