"दर्द की पराकाष्ठा "
"दर्द की पराकाष्ठा "
दर्द की पराकाष्ठा जिंदगी का एक हिस्सा,
विचित्र होता है ये इंसान की ताकत का निशान।
हर टूटे दिल में छुपी होती है एक कहानी,
जिसकी अनजानी में छिपी होती है निराशा की आवाज़ी।
मजबूरियों की डोर में जकड़े ज़िंदगी के बंधन,
कभी उड़ा देते हैं मन की उड़ान।
पर इन टूटे दिलों का बलिदान ही काम आता है,
मानवता की जड़ों को प्रतिष्ठा दिलाता है।
आँसुओं का सम्राट बनकर रहेंगे हम,
इन खोये लम्हों की कहानी कहेंगे हम।
हर धड़कन के संग एक किस्सा छिपा है,
जो सबके दिल की गहराइयों में उतरा है।
दर्द की वादियों में चलना है हमें,
जीवन के आँधी-तूफानों का साथ देना है हमें।
हर खोये सपने के पीछे एक आशा है,
जो बहार देगी, खुशियों की बौछार है।
दिल के टुकड़ों से सजाएंगे ख्वाब नए,
हकीकत के दरिया में लहराएंगे प्यार नया।
जब तक जीना है, तब तक मरते रहेंगे,
दर्द को जीने का तरीका बताते रहेंगे।
दिल का टूटना और दर्द की पराकाष्ठा,
इस जीवन की विचित्र विलाप की कहानी।
जब सपने टूट जाते हैं बिखर जाते हैं,
चिढ़ते हैं आँसू और आत्म-विश्वास की वाणी।
जीने की कला अद्वितीय है और खास,
इसमें है रंगी हुई बातें और आवाज़।
दिल का टूटना और दर्द की पराकाष्ठा,
यहीं बसती है इस कविता की आत्मा।
