STORYMIRROR

Nalanda Satish

Abstract Tragedy

3  

Nalanda Satish

Abstract Tragedy

मजबूर

मजबूर

1 min
233

हालत ना बतायी हमने कभी

हालातों से मजबूर हो गए हैं हम।


सवाल ना पूछा हमने कभी

सवालातों के कटघरे में खड़े हो गए हैं हम।


जरूरतें ना बढ़ाई हमने कभी

बेकार के सामान से परेशान हो गए हैं हम।


गम का ठीकरा ना फोड़ा हमने कभी

इस शोरगुल से शर्मिंदा हो गए हैं हम।


चाहत किसी पर ना थोपी हमने कभी

सपनों के पुलिंदों से घबरा गए हैं हम।


वजूद का हिस्सा ना मांगा 'नालंदा 'हमने कभी

बेहिचक घुसपैठ से हैरान हो गए हैं हम।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Nalanda Satish

Similar hindi poem from Abstract