STORYMIRROR

Rupal Sanghavi "ઋજુ"

Tragedy Others

3  

Rupal Sanghavi "ઋજુ"

Tragedy Others

"दोबारा कभी..."

"दोबारा कभी..."

1 min
143

कॉन्क्रीट वन

विकास या विनाश?

वृक्ष उवाच

साँसे महँगी

सस्ती मौत है यहां

प्रदूषण से

ऊंचे पर्वत

नदी, सागर, खेत

लहलहाते

रंगी नज़ारे

हरिता, और शुद्ध

अनिल, जल

दोबारा कभी

प्रकृति का सौंदर्य

देख पाएंगे?

संभल जाएं

और ईश्वर से हो

क्षमा याचना

 



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy