दिल के पन्नों के राज
दिल के पन्नों के राज
दिल के पन्नों में कुछ राज रखता हूं,
हर दफा तुम्हें अपने पास रखता हूं।
खामोश हूं, कुछ कहने से डरता हूं,
सिलसिला हूं वक्त का, तुम्हारे साथ ढलता हूं।
तुम्हारी आहट अपनी धड़कन में रोज सुनता हूं।
दूर हूं तुमसे, हर पल तुमको याद करता हूं।
पूछता हूं खुद से, तुमसे क्यों वास्ता रखता हूं?
इसलिए रोज खुद से गिला-शिकवा भी रखता हूं।
इश्क़ हूं मैं, रोज तुमसे मिलता हूं,
और तुमसे ही राबता रखता हूं।
तुम्हें हमेशा अपने दिल में रखता हूं,
तुम्हारी गुफ्तगू में खुद को मसरूफ़ रखता हूं।
तुम्हारे साथ वक्त, एक अच्छा मुकाम रखता है,
ना बात करूं तुमसे, तो मुझको हर लम्हा खलता है।
तोड़ न दो दिल इसलिए खुद को खामोश रखता हूं,
और इजहारे मुहब्बत के ख्याल को भी दूर रखता हूं।
मेरी जान हो, बस यही गलतफहमी रखता हूं,
ज़र्रा हूं मैं, तुम्हारे बिना वजूद ही कहां रखता हूं?
तुम्हें पाने की बस ज़िद रखता हूं,
इसलिए तुमसे ही राबता रखता हूं।
सहम जाता है दिल, तुमसे दूर होने के ख्याल से,
इसलिए तुम्हें अपने दिल के रूबरू ही रखता हूं।
छोड़ना ना मुझे, मैं तुम्हारे बिना चलने से भी डरता हूं,
तुम हो दिल में, बस यही गुमान रखता हूं।

