STORYMIRROR

Prem Bajaj

Romance

4  

Prem Bajaj

Romance

गज़ल ---- आंखें

गज़ल ---- आंखें

1 min
461

तेरी एक नज़र ने तबाह कर दिया वो नशा है तेरी आंखों में

जितना ढूंढा खुद को उतना ही डुबते गए तेरी आंखों में।


नहीं कोई जानता मुझे इस शहर में बेगाना हूं मैं 

जिसने भी देखा मुझे बस देखा तेरी आंखों में।


क्यूं करते हो नक़ाब कभी तो बेनकाब रहा करो 

ना झुकाओ पलकें खुद को देखना है तेरी आंखों में।


तरसते रहे हम तेरे लबों से इकतारे -मोहब्बत के लिए 

हम बेखबर रहे देख ना पाए हकीकत तेरी आंखों में।


रक़ीबों पर लुटा रहे हो तुम वो प्यार अपना 

जो प्रेम को देखने की चाह थी तेरी आंखों में।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance