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Pari P

Romance

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Pari P

Romance

विरह

विरह

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जो तेरा 

इश्क़ मेरे सीने 

में पिघलता है, 


वो अश्क़

बनकर मेरी आँखों

से बहता है,

टूटता है ये

तेरे बेबाक़पन से,


फिर बड़ी हसरतों से

यह सम्भालता है,

तुम तो ऐसे ना हो

यह सोच दिल

मेरा बहलता है,


सुनो,

आज भी फुरकत 

की शाम में

आँखें तेरे दीदार को

तरसता है।


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