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Pari P

Abstract

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Pari P

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वक़्त

वक़्त

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काली स्याह  रात, 

भयावह रात

टिकती कहाँ है,


जब रोशनी आ जाए

बंदगी, दुआ,बददुआ सब

वक़्त के मोहताज है,


चढ़ता सूरज, ऊँची किरदार 

भी ढल जाये

अगर वक़्त नहीं शफ़ीक़ है।


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