STORYMIRROR

Sangeeta Agarwal

Romance

4  

Sangeeta Agarwal

Romance

प्रेम

प्रेम

1 min
311

प्रेम को कैसे समझाया जाए,

प्रेम को शब्दों में न बांधा जाए,

परिभाषित करने को इसको

शब्द कम पड़ जाते हैं....


शायद इसीलिए "मुस्कराहट" बनी,

"आंखें" और" मौन" बना,।

बिना बोले,समझाए,सब कुछ समझ

आ जाये,वो ही प्रेम कहलाये।


ये दो रूहों की आपसी मुलाकात है,

बिना बोले,कहे,दो लोगों की बात है।

इसमें आंखे सब कुछ बोल जाती हैं,

मौन और मुस्कराहट,सारे राज खोल जाती है।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance