STORYMIRROR

Sangeeta Agarwal

Others

4  

Sangeeta Agarwal

Others

ताला चाभी

ताला चाभी

1 min
358

तू ही मेरा ताला,तू ही मेरी चाभी,

सौंप दिए सारे अधिकार,लगन जब से लागी।


तुझसे शुरू होके,तुझपे खत्म होती थी,

मेरी जिंदगी की राहें,तुझसे ही तो बंधी थीं।


लगा के क्यों फिर ताला,क्या चाभी फेंक दी है?

मुझे खुद से बांध के, क्यों मेरी आज़ादी बेच दी है?


क्यों भूलता है,हर ताले की डुप्लीकेट चाभी भी बनती है।

एक बार जो लग जाये,फिर रोके नहीं रुकती है।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन