STORYMIRROR

DR ARUN KUMAR SHASTRI

Fantasy

4  

DR ARUN KUMAR SHASTRI

Fantasy

दीपावली की रात

दीपावली की रात

1 min
208

दीपावली की रात 

एक दिया उन मकानों की 

दहलीज पर भी रख देना 

जिन मकानों में कोई रहता नहीं है 


जिन मकानों में कोई रहता नहीं है 

मगर इन मकानों में भी वोही दीवारें हैं 

वोही छत है जो सदा से मानवता

 की लाज सम्हाले रहती हैं 


ढक लेती हैं सुख दुख सारे

और अनगिनत विपदाओं में 

हमें सुरक्षा देती हैं 

दीपावली की रात 

एक दिया उन मकानों की


दहलीज पे भी रख देना 

जिन मकानों में कोई रहता नहीं है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Fantasy