STORYMIRROR

Goldi Mishra

Romance

2  

Goldi Mishra

Romance

धुल गए रंग

धुल गए रंग

1 min
137

आओ देखो बे रंग हूं बे दाग हूं,

सुर में नहीं आज बे राग हूं,


ठंडक सी मिल जाए तुम जो आजाओ

देखो आज भी वही आग हूं,


फागुन आई मैं उसमें बेदाग हूं,

आजा अब तो देख तेरे लिए बे रंग हूं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance