धोखा एक दुर्भाव
धोखा एक दुर्भाव
धोखे से बड़ा कोई दुर्भाव नहीं।
दे दो भले ही धोखा इससे दूर होगा तुम्हारा अभाव नहीं।
छल का परिणाम तो छल ही होगा।
कर्मों का फल तो भुगतना ही होगा।
किसी का विश्वास तोड़ने से बड़ा पाप क्या होगा?
अब तुझ पर भी विश्वास किसी का ना होगा।
औरों की तो छोड़ो जवाब तो तुझे एक दिन खुद को भी देना होगा।
रिश्तों की कीमत तुझे जब तक समझ आएगी।
तब तक जीवन में तुझे बहुत देर हो जाएगी।
इस परमात्मा के राज में कोई किसी को धोखा दे नहीं सकता।
बस होते हैं कुछ कर्मों के फल जो कि हर प्राणी है भुगतता।
इस सरल शांत से जीवन को यूं कठिन ना बना।
प्रेम कर लो सबसे।
ना कर किसी के साथ दगा।
