देश का सवाल???
देश का सवाल???
यदि सारे देश में एकता है ! तो दुश्मन के क्यों अपने नापाक इरादें पूरे हो रहे हैं ? क्यों वो अपने मंसूबों में सफल होते जा रहे हैं ?
उन्हें कैसे मालूम पड़ता है कि कब यहाँ क्या हो रहा ?
कौन उन्हें इतला करवा रहा उन्हें हमारी हरेक कदम ?
लोग आखिर देश के गद्दार क्यों होते जा रहे ? क्यों अपनी माँ और मातृत्व से मुख मोड़ रहे हैं ? लोग क्यों अपने चमन से ही चाटुकारिता कर रहे ?
उस धरा को धोखा दे रहे जिनकी मिट्टी में पल- बढ़कर वो आज यहाँ तक बड़े हुए ?
एक रोज भी हम उन वीर सपूतों के लिए क्यों नहीं जागते ? जो रोज जगकर हमारी हिफाजत करते हैं।
जो खुद कच्ची नींद जगकर हमें बेफिक्र सुलाते हैं।
जो दीवाली में भी होली का पर्व मनाकर हमारा हर्षोल्लास बढाते हैं। आखिर हम भी तो देश के नागरिक हैं न ! खुद को बड़ा देशभक्त बतलाते हैं।कहाँ जाती है हमारी देशभक्ति? जिस समय हमारी माँओं ,बहनों के साथ कुकृत्य किया जाता है। और हम कुछ मोमबत्ती जलाकर अपनी औपचारिकता निभाकर चूप बैठ जाते हैं ! क्या यही होती है देशभक्ति और ऐसा ही होता है देशभक्त ?
कहीं इसमें अपनों का ही तो हाथ नहीं ?
अगर हाँ तो आखिर कौन है वह ? और क्यों कर रहा है अपनी माँ से बेवफाई ?
पता लगाओ उन जयचंदों की ? नष्ट कर दो उन निर्लज्जों को जो अपनी माँ की दूध का कर्ज भूल गये ? वैसे चुका तो हम जिंदगी भर भी नहीं सकते अपनी माँ का कर्ज! मगर ग्लानि से उनका सर हम झुकाने की जहमत क्यों उठायें ?
क्यों इनकी गद्दारी का खामियाज़ा किसी की राखी ? किसी की सिंदूर ? किसी कि आँचल को खोकर भुगतना पड़े ?
ये आपका ,हमारा, हमसब का अपितु पूरे देश का सवाल है ?? जवाब भी देश के ही पास है ?
तो फिर ढूंढिए जवाब ! आखिर ये देश का सवाल है ?
