STORYMIRROR

Brijlala Rohanअन्वेषी

Action Classics Inspirational

4  

Brijlala Rohanअन्वेषी

Action Classics Inspirational

लोकतंत्र के सभ्य कॉकरोच

लोकतंत्र के सभ्य कॉकरोच

1 min
10

दंतेवाड़ा और दुमका की पुरखौती ज़मीन से बेदखल कर
‘वे’ दिल्ली की ओर हाँके जा रहे हैं।

‘उन्हें’ फरमान जारी हुआ है—
उन कॉकरोचों को भी अब
सिविलाइज़्ड बनाया जाएगा!

जिन्हें सदियों से वे रौंदते आए थे,
परजातंतर में कुछ कॉकरोच
ज़रूरी हैं
लोकतंत्र की सेहत के लिए!

अब उन्हें अंगूठा नहीं,
अंगूठे का निशान चाहिए।
हाँ, उन्हें अब
उनकी संख्या का जुटान चाहिए।

इससे इतना तो सिद्ध ज़रूर हो गया कि
लोकतंत्र के पर्यावरण के लिए
कॉकरोच ज़रूरी हैं।

वे सिसक-सिसक कर
उनके सभ्य कल्चर को
दूर से ही कर रहे हैं—
जोहर! जोहर! जोहर!


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Action