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Shivam Madrewar

Action Fantasy

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Shivam Madrewar

Action Fantasy

और खिलौनों की तरह सपने टूट जाते हैं ।

और खिलौनों की तरह सपने टूट जाते हैं ।

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दिन भर सपनों के पीछे हम दौड़ते हैं,

अख़िर असफलता हम पाते हैं,

रात को ये आँखें रोते रोते सोते हैं,

और खिलौनों की तरह सपने टूट जाते हैं ।


हम आसमान के तरफ़ देखते हैं,

हारकर भी दुनिया के सामने रोते हैं,

देर रात तक हम उसी के बारे मैं सोचते हैं,

और खिलौनों की तरह सपने टूट जाते है ।


हार मान कर भी हम सर उठाते हैं,

वो नाम पर लगा हुआ कलंक हम मिटाते हैं,

वहाँ तक पहुँचने से पहले ही डर जाते हैं,

और खिलौनों की तरह सपने टूट जाते है ।


जीत की आशा हम दिल मैं रखते हैं,

रात का दिन भी हम कर देते हैं,

आशा की किरण हम ढूँढते ही रहते हैं,

और खिलौनों की तरह सपने टूट जाते है ।


जहाँ से शुरू किया था वही पे आ जाते हैं,

जाते जाते रास्ते भूल हम जाते हैं,

कोशिशें भी घुटने टेकती हैं,

और खिलौनों की तरह सपने टूट जाते है ।



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