देखकर
देखकर
पहली मुलाक़ात में मोहब्बत उससे हो गयी,
प्रेम का दरिया उसकी आँखों से उमड़ता देखकर।।
इज़हार ए मोहब्बत में मुझसे जरा देर हो गयी,
जल भुन गया उसे किसी और की बाहों में देखकर।।
निर्लज्जता से उसके पास गया देने लगा धमकी,
ख़ुद पर शरम आयी,बाहुपाश में उसकी सखी को देखकर।।

