डरावना रहस्य
डरावना रहस्य
एक कुआं जंगल के पास,
अंधकार घना, गहराया रहस्य ..!
चमकादड़ों का फड़फड़ाहट ,सांप की फूंकार ,
वृक्ष के कोटर में उल्लू की पैनी नजर..!
बिच्छुओं का रेंगना, आकाश में अंधकार,
रोती हुई बोली में चीखता सियार ..!
अजब तमाशा, अजीब डरावना रहस्य छिपता,
पीछे के राज से पर्दा पर कई बार प्रश्न उठता ..!
उस धुंधली दुनिया के भीतर अविकसित कितने सच,
मौन हैं पर उकसाते हमको ,बन दीवार पाप -पुण्य के तथ्य..!
पारंगत नहीं हम जो जान पाएं इतने गूढ़ रहस्य,
अंधेरों की भाषा से अनभिज्ञ, छिपे गर्भ में पले भविष्य..!
काल रात्रि जब काली चूनर से तारों को ढक देती है ,
अपनी पोटली में चांद और तारों को गुप्त तरीके से रख देती है ..!
ना जाने कितने रहस्य गुपचुप रह जाते हैं ,
उजाले में जो दिखते हैं वही हम समझ पाते हैं ..!
