STORYMIRROR

ADITYA MISHRA

Drama Others

3  

ADITYA MISHRA

Drama Others

चुनाव की महिमा

चुनाव की महिमा

1 min
339

लोकतंत्र है यहां

जनता की सरकार है,

पर चुनाव तक ही सब चर्चे सही है

बाकी सब बेकार है।


जनता जनार्दन भी बन जाती है

दिन इलेक्शन की जब आती है,

सारे नेता बन जाते हैं सेवक

वोट के लिए सब स्वीकार है।


चुनाव जब हो जाती है

दिन वोटिंग के गुजर जाती है,

फिर जनता तो कठपुतली होती है

सरकार तो सरकार है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama