STORYMIRROR

ADITYA MISHRA

Abstract

3  

ADITYA MISHRA

Abstract

फितरत जिंदगी की

फितरत जिंदगी की

1 min
303

बहुत मुश्किल होता है वो वक्त

जब साथ अपनों का छूट रहा हो,


जिनके बिना वजूद न थी हमारी

वो आज बस यादों में सिमट रहा हो।


फितरत भी कैसी है जिंदगी की

अजनबियों को अपना बनाकर

उनसे ही दूर कर देती है,


फिर किसी धुंधली तस्वीर को देखकर

उन यादों में जीने की तड़प आंखें भर देती है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract