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Gaurav Dwivedi

Romance Inspirational Others

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Gaurav Dwivedi

Romance Inspirational Others

चलो आज ख़ुद को!! (भाग-1)

चलो आज ख़ुद को!! (भाग-1)

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ॐ जय श्री राधे-कृष्णा ॐ 


चलो आज खुद को पुनः ढूंढते हैं

पुरानी किताबें पुनः खोलते हैं

जो मोड़े थे पन्ने कभी प्रीत लिखकर

चलो आज उनको पुनः खोलते हैं

चलो आज खुद को पुनः ढूंढते हैं!


वो सपनों की दुनिया जो हमने बुनी थी

वो सुंदर घरौंदे जो संग में गढ़े थे

सदा संग रहने का संकल्प लेकर

जो बुनियादें हमने धरी प्रीत की थीं

उसी दुनिया में आज फिर घूमने को

चलो वो ही सपने पुनः देखते हैं

चलो आज खुद को पुनः ढूंढते हैं!


हरी घास के मखमली वो बिछौने

वो तारों टँकी झिलमिलाती सी चादर

वो पूनम के चन्दा का दीपक सा जलना

धवल चांदनी का वो रातें निगलना

उसी प्रीत वन का फिर अहसास पाने

चलो प्रीत वन वो पुनः ढूंढते हैं

चलो आज खुद को पुनः ढूंढते हैं!


वो उपवन जहाँ बैठे रहते थे हम तुम

जहाँ पतझरों में बहारें थीं खिलती 

वो नदिया के पनघट की शीतल बयारें

वो हाथों को हाथों में थामें टहलना 

उसी प्रीत को फिर से जीवंत करने

चलो रस्में वो ही पुनः ढूंढते हैं

चलो आज खुद को पुनः ढूंढते हैं!


चलो आज खुद को पुनः ढूंढते हैं

पुरानी किताबें पुनः खोलते हैं

जो मोड़े थे पन्ने कभी प्रीत लिखकर

चलो आज उनको पुनः खोलते हैं

चलो आज खुद को पुनः ढूंढते हैं!!



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