चल उठ आकाश है पुकारता
चल उठ आकाश है पुकारता
चल उठ आकाश है पुकारता
तुझे देख के है वो दुलारता
कहता है वो मिटा दे ये दूरियाँ
तुझमें मैं हूँ मुझमे हैं तेरी छवियाँ।
अब तक तू मौन क्यूँ रहा
क्यूँ हर दुख तूने ऐसे है सहा
मैं तो रोज़ तुझे अपने साये में रखता हूँ
तुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता हूँ।
देख मुझे मैं हूँ अनंत आकाश
बांध खुद को मुझसे, ले संयम का पाश
यदि हम दोनों मिल जाएँ एक दूसरे में
जीवन का सार पा जाएगा तू एक पल में।
है ये जीवन भी मेरी तरह अनंत
केवल शरीर है मिटता नहीं होता आत्मा का अंत
इसलिए जी ले खुल के तू मेरी तरह
फैसला ले तू, ना कर कोई जिरह।
हर दिन लाता है एक नया सवेरा
बना ले अपनी हिम्मत से एक नया बसेरा
जिसमे हो केवल साहस और विश्वास
देख रहा हूँ स्वयं मैं तेरी ओर लगाए आस।।
