STORYMIRROR

AKSHAT YAGNIC

Abstract

3  

AKSHAT YAGNIC

Abstract

वह रात का अंधेरा

वह रात का अंधेरा

1 min
11.9K

वह जो रात का अंधेरा है

उसने आकर मुझे घेरा है

कहता है मुझसे मुझ में समा जा

और मुझ में ध्यान लगा के

अमूल्य धन तू कमा जा 

यह धन होगा हमेशा तेरे साथ

नहीं आएगा किसी और के हाथ

अंधेरे से सीख उजाले की कीमत क्या है

अंधेरे में आकर देख जीवन की कीमत क्या है 

यह अंधेरा सिखाएगा तुझे जीने के गुण

और इन्हीं गुणों से फिर तू नए सपने ले बुन

उन्हीं सपनों से खड़ा कर संसार अपना

जिसकी नींव में हो अंधेरे से जागा हुआ सपना

तभी तेरा जीवन हो पाएगा सफल 

क्योंकि अंधेरा ही तो है तेरे जीवन के उजाले का फल!


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract