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अजय केशरी

Drama

5.0  

अजय केशरी

Drama

छांव

छांव

1 min
360


गांव की छांव में,

हम मिले थे जहां

जिंदगी में ना कोई,

कमी थी वहां।


हम थोड़े सी कमाई में,

खुशहाल थे !

हर चेहरे पर दिखता था,

अपना सा प्यार !


हम कहां आ गए,

आज शहरों में हम !

जहां जीवन के नाम पर,

घुटते है दम !


तंग गलियों में गुज़रे,

अब जीवन यहां !

जहां जीने के बदले में,

मरते है हम !


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