STORYMIRROR

Anu Chatterjee

Abstract Drama Inspirational

4  

Anu Chatterjee

Abstract Drama Inspirational

बादल -सा मन

बादल -सा मन

1 min
23

है हुंकारता ये बादल-सा मन, 

कभी भीतर की गर्जना किसी ने सुनी नहीं. 


मुझमें मैं कहीं भी नहीं, 

फिर भी होश में रहा नहीं.  


दौड़ता चिंघाड़ता बहता चला गया,

बस रुकने की ज़िद की नहीं.


ये खुद से विरह की निशानी 

मुझे धुंधली सी दिखाई क्यों दी ?


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract