STORYMIRROR

अजय केशरी

Inspirational

1  

अजय केशरी

Inspirational

प्रदूषण

प्रदूषण

1 min
46

जल बिना जीवन नहीं है,

जीवन ही है जल

काट रहें है पेड़ पौधों को,

बना रहें है घर

आबादी अभिशाप बनी है,


रोज़ ही बढ़ती जा रही

निगल रही है हर संसाधन,

प्रकृति ने जो दी है

हवा प्रदूषित हो गई,

नदियां हो गई गंदी है

पेड़ पौधों को काट दिए है,


ताप बढ़ती ही जा रही

अभी नहीं सम्हले तो हम,

जीवन बचना मुश्किल है

ताप बढ़ेगा इतना जग में,

सब कुछ राख हो जाएगा


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational