Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

ख़्वाहिश

ख़्वाहिश

1 min 79 1 min 79

ख़्वाहिशें इतनी न पालो,

जो सबब बन जाय..!

ख़्वाहिशें इतनी ही पालो,

जो पुरी हो जाए !


जिंदगी बन जाती जहुन्नम,

पुरी करते ख़्वाहिशें !

चाहते कहां होती पूरी,

रोज़ नए एक जन्म लेते !


जिंदगी ऐसे ही चलती,

सपने टूटते बुनते है !

सपने ही हमें जीने की,

रोज़ नई उम्मीदें देते !



Rate this content
Log in

More hindi poem from अजय केशरी

Similar hindi poem from Inspirational