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Kanak Agarwal

Abstract Classics Fantasy

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Kanak Agarwal

Abstract Classics Fantasy

चांद

चांद

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है तो चट्टानी गोला ही

पर ना जाने क्या आकर्षण है इसमें ?

कितनी शीतता हैै

जो लुभाता है एक दुधमुंहे बच्चे को भी


प्रेमियों के दिल में धडकता हैै,,

ये महबूब बनकर

आस्था और विश्वास जगाता है 


सिखाता है,,

 स्थाई नहीं है कुछ भी

कभी पूनम है तो कभी अमावस

हाँ, ये चट्टानी गोला 

धरती का चांद है।


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