STORYMIRROR

Kanak Agarwal

Romance Fantasy

3  

Kanak Agarwal

Romance Fantasy

मुझ में रब बसता है

मुझ में रब बसता है

1 min
183

मेरा मन उपवन जब तरसता है

तेरी यादों का घन बरसता है…


खिल उठती है कली कली

हर फूल तब महकता है...


दिल की बस्ती वीरान नहीं

महफ़िल में तू ही रहता है...


लोग कहें चाहें दीवाना

मुझमें तो रब बसता है....!!



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance