Kanak Agarwal
Fantasy Inspirational
आज मन के अंधेरे से कोने में झांकते हैं
इक सीला सा दुख पड़ा है उसे बुहारते हैं
ख्वाहिशों और उम्मीदों का रोगन करते हैं
खुशियों के दीप से उसे रोशन करते हैं
आओ इस दीपावली कुछ ऐसा करते हैं
रोशन दीवाली
प्रकृति और स्...
तस्वीर युद्ध ...
इश्क़
प्रेम
हम तो बस तेरे...
मनमर्जी
मुझ में रब बस...
झरना
जिंदगी
मृदुल अधर से सुंदर सुर पर हिरनी सी थिरकती बाला, मृदुल अधर से सुंदर सुर पर हिरनी सी थिरकती बाला,
मातृ--दिवस पर समर्पित एक भाव-प्रवण कविता , जो आपके अंतरमन को गहरे तक झझकोर देने का माद्दा रखती है मातृ--दिवस पर समर्पित एक भाव-प्रवण कविता , जो आपके अंतरमन को गहरे तक झझकोर देने ...
अगर तड़प दोनों तरफ होगी वो सुनहरी शाम भी सजाएगा। अगर तड़प दोनों तरफ होगी वो सुनहरी शाम भी सजाएगा।
जिसकी जितनी "जरूरत" थी_ _उसने उतना ही "पहचाना "मुझे! जिसकी जितनी "जरूरत" थी_ _उसने उतना ही "पहचाना "मुझे!
ठहर जाओ तुम, मेरे नयन में ठहरो, इस तन, मन में ठहर जाओ तुम, हृदय भवन में ठहर जाओ तुम, मेरे नयन में ठहरो, इस तन, मन में ठहर जाओ तुम, हृदय भवन मे...
जीवन का सार सृष्टि के कण कण में है, जीवन का सार सृष्टि के कण कण में है,
जब पहली दफा आँखें मिले थी तुमसे, सफ़ेद रंग पहने सब से अलग नज़र आ रहें थे । जब पहली दफा आँखें मिले थी तुमसे, सफ़ेद रंग पहने सब से अलग नज़र आ रहें थे ।
रिमझिम रिमझिम सा बरसा है l घायल मन कुछ तो बोला है l रिमझिम रिमझिम सा बरसा है l घायल मन कुछ तो बोला है l
अनुभूतियों को समझने का एक प्रयास..... अनुभूतियों को समझने का एक प्रयास.....
पर वह शांत पानी में कंकड़ मारकर सब कुछ अशांत करने में लगी रहती है। पर वह शांत पानी में कंकड़ मारकर सब कुछ अशांत करने में लगी रहती है।
उन पत्तों पर पैर रखकर उनकाे कुचलकर बढ़ जाते हैं आगे उन पत्तों पर पैर रखकर उनकाे कुचलकर बढ़ जाते हैं आगे
शासन और प्रशासन मिलकर दिन-रात काम कर रहे, उनके अथक प्रयास से सारे चौराहे संवर रहे। शासन और प्रशासन मिलकर दिन-रात काम कर रहे, उनके अथक प्रयास से सारे चौराहे संवर रह...
उसकी दीदार की हर तारीख, दिल कागज़ पर लिखता रहता है उसकी दीदार की हर तारीख, दिल कागज़ पर लिखता रहता है
ये सब मैं बिना तुम्हारी तरफ़ देखे भी कैसे देख लेता था , ये सब मैं बिना तुम्हारी तरफ़ देखे भी कैसे देख लेता था ,
मेरे जीवन के तुम कान्हा, सच्चे साथी बन जाना, मेरे जीवन के तुम कान्हा, सच्चे साथी बन जाना,
उस वक़्त नहीं चलेगी आपकी मनमानी खोलने होंगे अपने नेत्र और होंठ के दोनों पट उस वक़्त नहीं चलेगी आपकी मनमानी खोलने होंगे अपने नेत्र और होंठ के दोनों पट
कोने कोने में हंसीं मिल जाती है बचपने के मस्त मौला मिजाज फिर मिल जाते है कोने कोने में हंसीं मिल जाती है बचपने के मस्त मौला मिजाज फिर मिल जाते है
फूलों ने भी सहलाया है बालों को । गजरे ने बढ़ाया हैं, उनकी रौनक को ।। फूलों ने भी सहलाया है बालों को । गजरे ने बढ़ाया हैं, उनकी रौनक को ।।
क्या भावुकता ने अटका दी, तेरे जीवन की गति स्पष्ट? क्या भावुकता ने अटका दी, तेरे जीवन की गति स्पष्ट?
कभी पल भर में संसार का भोग करता तो कभी किए गए कभी पल भर में संसार का भोग करता तो कभी किए गए