STORYMIRROR

Kanak Agarwal

Others

4  

Kanak Agarwal

Others

जिंदगी

जिंदगी

1 min
253

सफ़र में थी जिंदगी और हम चलते चले गए

वक्त की थी कुछ कमी कि हम दौड़ते चले गए


कभी चाह कभी वफ़ा के धागे टूटते गए

तो कभी अना कभी गरूर का हाथ थामते गए


कुछ तो थीं मजबूरियां वक्त से क़दम मिलाते चले गए

और कुछ थीं बदगुमानियां कि अहम् साधते चले गए


अब ना किसी राह ना मंजिल का कोई पता चले

अमन में थी ये जिंदगी हम भंवर लाते चले गए।


Rate this content
Log in