शालिनी मोहन
Drama
अ आ इ ई उ ऊ
ए ऐ ओ औ अं अः
और दुनिया की सबसे
सुदंर और छोटी।
कविता
क से कबूतर।
प्रस्तुति
साड़ी में लिपट...
दहेज़
अख़बार
मन एक पंछी
समीकरण
नाम
मंदबुद्धि
मूर्ख दिवस
बुढ़ापा
बस दे दो एक टुकड़ा बादल का मुझे, तुम रख लो पूरा आसमान। बस दे दो एक टुकड़ा बादल का मुझे, तुम रख लो पूरा आसमान।
दर्द मुस्कराहट की, दबाने से ना दबे, दर्द आँखों की, छिपाने से भी ना छिपे । दर्द मुस्कराहट की, दबाने से ना दबे, दर्द आँखों की, छिपाने से भी ना छिपे ।
दिल के कोने में छिपे जज़्बात की कोई आवाज तो होगी, दिल के कोने में छिपे जज़्बात की कोई आवाज तो होगी,
तुझे नहीं पता पर, ये ज़िन्दगी टिकी ही है तुझ पर...! तुझे नहीं पता पर, ये ज़िन्दगी टिकी ही है तुझ पर...!
कोई भी नहीं, यहां पर तेरा जाग मुसाफ़िर, हुआ सवेरा कोई भी नहीं, यहां पर तेरा जाग मुसाफ़िर, हुआ सवेरा
कठिनाइयों के सामने यूँ मजबूर ना हो तू खुद ही एक कोहीनूर है ! कठिनाइयों के सामने यूँ मजबूर ना हो तू खुद ही एक कोहीनूर है !
जो खुद का ढोते है, भार धरती का बढ़ाते है, भार जो खुद का ढोते है, भार धरती का बढ़ाते है, भार
किसी का विश्वास शीशे जैसा घर जो टूट जाये तो फिर न जुड़े नर किसी का विश्वास शीशे जैसा घर जो टूट जाये तो फिर न जुड़े नर
जो पहने आलस्य नर मुंड वो नहीं पाते, सफलता कुंड जो पहने आलस्य नर मुंड वो नहीं पाते, सफलता कुंड
अरुणाचल में उगते सूर्य का मनमोहक दृश्य है l मेरा भारत सोने की चिड़िया.... अरुणाचल में उगते सूर्य का मनमोहक दृश्य है l मेरा भारत सोने की चिड़िया....
धड़कनें भी जाने कब दग़ा दे जाएँ सांसें भी मेहमान हैं कुछ पल की धड़कनें भी जाने कब दग़ा दे जाएँ सांसें भी मेहमान हैं कुछ पल की
जो लोग यहां पर खुद्दारी से जिया करते है।। वो आदमी यहां पर कामयाबी से मिलते है। जो लोग यहां पर खुद्दारी से जिया करते है।। वो आदमी यहां पर कामयाबी से मिलते है...
कोई यहां स्वार्थी इंसानों से दुःखी है कोई अपने आप से ही बहुत दुःखी है कोई यहां स्वार्थी इंसानों से दुःखी है कोई अपने आप से ही बहुत दुःखी है
मुखौटों में ही हम उलझे रहते, लगाते रहते हैं विविध अनुमान। मुखौटों में ही हम उलझे रहते, लगाते रहते हैं विविध अनुमान।
इल्म हुआ मुझे सबसे खूबसूरत है इश्क का अख़्तर होना इल्म हुआ मुझे सबसे खूबसूरत है इश्क का अख़्तर होना
सात अरब से भी अधिक जनता, हर मानव की कोई न कोई समस्या वास्तविक या काल्पनिक। सात अरब से भी अधिक जनता, हर मानव की कोई न कोई समस्या वास्तविक या क...
वो दिन भी क्या गजब थे जब हल्की सी चोट लगती थी, तो आँख से आंसू आते थे वो दिन भी क्या गजब थे जब हल्की सी चोट लगती थी, तो आँख से आंसू आते थे
इस चादर में तेरे स्पर्श को तलाशते, तेरी छुअन की मिलावट याद करते है हम इस चादर में तेरे स्पर्श को तलाशते, तेरी छुअन की मिलावट याद करते है हम
आती है, मौत यह, क्रोधाग्नि खूं जलाती, जोत क्रोध है, खोट आती है, मौत यह, क्रोधाग्नि खूं जलाती, जोत क्रोध है, खोट
दिन दोपहर में लाइट का जाना बरगद के पेड़ के नीचे बैठे हर एक मुंह से सुनी कहानी दिन दोपहर में लाइट का जाना बरगद के पेड़ के नीचे बैठे हर एक मुंह से सुनी कहानी