STORYMIRROR

neha chaudhary

Tragedy

3  

neha chaudhary

Tragedy

बो चला गया...

बो चला गया...

1 min
316

ना मैंने सोचा ऐसा कभी

तू मुझको इतना रुलायेगा

मेरी मुस्कान का जरिया तू

मुस्कान मेरी ले जायेगा

दिन ढलता गया, शाम आने लगी

दिल मुझसे मेरा कहता रहा

वो जा रहा है छोड़कर,

फिर वापस कभी ना आएगा

दिल की ना सुनी, मन की ना सुनी,

उस दिन को कैसे भूलूँ अब

जब बाट मैं तेरी निहार रही

जब आया तू था पास मेरे

मैं ठगी ठगी सी रह गयी 

क्या कर डाला तूने पगले

ना सोचा एक बार मुझे......

अखियाँ बरसी नैना तरसे

घर पूरा शोक में डूब गया

एक बार सोचता ऐ पगले

मेरा क्या होगा तेरे बिना

चला गया यूँ छोड़कर

मुझको बेगानी दुनिया में........... ll


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy