बिसरी यादें सारी
बिसरी यादें सारी
हरियाली फैली चारों ओर मौसम भी रंग बदल रहा।
देखो तो सूरज स्वर्णिम रश्मियां बिखेर रहा।।
धरती लगती सोना -पन्ना है अनुपम शृंगार।
चाॅंद सितारे नयन बिछाए है अद्भुत संसार।।
दूर क्षितिज के पार सागर लहरें उछल रही।
नभ को छूने को आतुर बातें उमड़ कहें यही।
पक्षी गण विचरण करते उन्मुक्त गगन में।
बादल भी कर रहे सैर अपनी ही धुन में।
पथिकों के पदचिन्ह रेत पर हैं बिखरे।
रूप प्रकृति सौन्दर्य प्रात में ही हैं निखरें।।
सुबह शाम स्वर्णिम सिंदूरी आभा बिखरी।
बिहग गये अब लौटें ले यादें सारी बिसरी।
