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Dimpy Goyal

Romance Tragedy

5.0  

Dimpy Goyal

Romance Tragedy

बिरहा-गीत

बिरहा-गीत

1 min
237


तुम्हें कैसे लिखूं मैं चिठियाँ गमगार मेरे

शब्द खो गए है मेरे और कलम ना चले 

बात इतनी है पुरानी कि हमको याद नहीं

कितने बरसों हो गए हैं तुमको देखे मिले 


मेरी आंखों में तो बरसों से नींद नहीं   

तू तो सोती है, चल ख्वाब में ही मिल ले  

दिल यह क्या लगा, तुमसे क्या हरजाई 

कैसे भी न फुसले, एक पल को न टले


मेरी रूह पर अंधेरा है इस तरह काबिज़

रोज सूरज चढ़ता है पर ना मेरी रात ढले 

सुर्ख ख्वाबों की गर्म राख में हूँ घिरा

अरमानों के अंगारों में, बस दिल ये जले 


गम के जुगनू तप कर सूरज बन गए

आंसुओं के समंदर अब आंखों में है पले 

अब तो हिचकी भी ना पूछती हाल मेरा

तुमको मैं याद भी हूँ कैसे तसल्ली मिले 


आंखें पत्थर ही चलीं, बेजान हुई उम्मीदें

आस का न कोई पंछी मुंडेर पे बोले 

मेरी हर सांस तक करती है जिक्र तेरा 

तुझको ही ढूंढते है, जब भी कदम चलें 


आरजू है तेरे दीदार की इक झलक ही सही

उसके बाद, चाहे जान मेरी, खुदा ले ले



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