STORYMIRROR

Deepa Saini

Tragedy

4  

Deepa Saini

Tragedy

बिखरते अरमान

बिखरते अरमान

1 min
275

शतरंज के मोहरे मुझे पसंद बहुत थे और शतरंज खेलना भी

शतरंज में मुझे सबसे अच्छी बात लगती थी

कि हाथी सीधा चलता तो घोड़ा ढाई चाल और सबसे अच्छी बात तो यह थी

कि राजा और रानी एक दूसरे के विश्वास के प्रतीक होते हैं राजा एवं रानी कब खेल तो पसंद था

लेकिन मैं रानी हूं ने को तत्पर थी तो फिर राजा ने चाल कैसे बदल दी

राजा खेल के नियम के विरुद्ध क्यों हो गए और हम शतरंज के मोहरे बनकर रह गएl

जिनके बच्चे रहने पर खेल तो चलता है लेकिन राजा रानी के बिना खेल खत्म हो जाता है

और मोहरा का कोई अस्तित्व नहीं रहता

काश !जिंदगी का खेल शतरंज की तरह होता

तो कोई चालबाज ना होता और हर सिपाहियों का अपना वजूद होता

पर शतरंज का खेल जिंदगी के खेल से कितना अलग है ना क्यों क्या कहते हो क्यों दिखाए जाते हैं

वह सपने जिन्हें तोड़ा जाता है

जिंदगी हो या अपने जब दिखाते हैं सपने तो फिर क्यों अरमानों को बिखेर दिया जाता है

जिंदगी मैं अगर कोई बातें ना करें दिखावे ना करें सपने ना दिखाएं तो फिर

जिंदा अरमानों को क्यों तोड़ दिया जाता है

मुझे अपना बना कर क्यों छोड़ दिया जाता है


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy