Asha Pandey 'Taslim'
Tragedy
जिस दिन बिखरेंगे
ताश के पत्ते
उस दिन
पत्ते-पत्ते बतायेंगे
जुआरी के हाथ में
खुजली कहाँ होती थी
कहाँ फटा था बवाई
कहाँ दरकी थीं रेखाएँ
बस वो दिन
जुआरी के हार की खीज पर
फेंक दिये गये
पत्ते की बिखरन से तय होगा।
जड़
कविता
पालनहार
गुनहगार
मसीहा
झींगुर
फ़न
बिखराव
_टेहलुआ
आरजू
जाति धर्म की आड़ में हिंसा अलगाववाद और वैमनस्यता फैलाकर जाति धर्म की आड़ में हिंसा अलगाववाद और वैमनस्यता फैलाकर
छोड़ पढ़ाई घर से निकले सपने कितने टूटे हैं छोड़ पढ़ाई घर से निकले सपने कितने टूटे हैं
उम्मीदों की नई उड़ान भरता रहा। उम्मीदों की नई उड़ान भरता रहा।
दबा हूं जिम्मेदारियों के बोझ तले, उठ रही है रग-रग में पीर।। दबा हूं जिम्मेदारियों के बोझ तले, उठ रही है रग-रग में पीर।।
तेरे बिना ये चांदनी रात मुझे अंधेरी लगती हैं, तेरे बिना ये चांदनी रात मुझे अंधेरी लगती हैं,
आसमान के सितारों के साथ, महफिल जमाकर मैं क्या करुं? आसमान के सितारों के साथ, महफिल जमाकर मैं क्या करुं?
मस्तमौला उसका मिजाज़ है, बेख़ौफ़ उसका अंदाज़ है, मस्तमौला उसका मिजाज़ है, बेख़ौफ़ उसका अंदाज़ है,
तुम्हारे तानों के बोझ तले दबी जा रही हूँ, तुम्हारे तानों के बोझ तले दबी जा रही हूँ,
ऊपरवाला जाने, हमारे भाग्य में क्या कुछ लिखा है उन्होंने... ऊपरवाला जाने, हमारे भाग्य में क्या कुछ लिखा है उन्होंने...
तुम्हारे ख्वाबों में हम रोज डुबते रहे, तुम्हारे ख्वाबों में हम रोज डुबते रहे,
छी: ! तुम मानव मन की गहराई को क्या ही जानते हो ? छी: ! तुम मानव मन की गहराई को क्या ही जानते हो ?
तुम्हारा खूबसूरत चेहरा देखे बिना चैन नहीं आता, तुम्हारा खूबसूरत चेहरा देखे बिना चैन नहीं आता,
लुत्फ उठाओ जिंदगी का, जिम्मेदारियों में क्यों दबे हो, लुत्फ उठाओ जिंदगी का, जिम्मेदारियों में क्यों दबे हो,
तुम्हें जीतना अच्छा लगता कदम कदम पर दे धोखा। तुम्हें जीतना अच्छा लगता कदम कदम पर दे धोखा।
जब आप जश्न मनाते हैं, लोग आपको खोज लेते हैं, जब आप जश्न मनाते हैं, लोग आपको खोज लेते हैं,
अब न तरसाओ मुझे ओ मेरी जानेमन, तुझे मेरी बांहों में सिमटा कर रहूंगा मैं। अब न तरसाओ मुझे ओ मेरी जानेमन, तुझे मेरी बांहों में सिमटा कर रहूंगा मैं।
जो मिटा सकती है फ़ासला मजदूर व मालिक का, जो मिटा सकती है फ़ासला मजदूर व मालिक का,
तेरी यादें लहरें बनकर मेरे हर पल को झकझोरने लगती है। तेरी यादें लहरें बनकर मेरे हर पल को झकझोरने लगती है।
पर कभी कभी सपनों में मुझसे मिलने आया करो। पर कभी कभी सपनों में मुझसे मिलने आया करो।
सूरज ने फिर मुझ से बोला मैंने गर्मी न बढ़ाई गाड़ियों का धुआँ भाई आग जंगल में लगाई इ... सूरज ने फिर मुझ से बोला मैंने गर्मी न बढ़ाई गाड़ियों का धुआँ भाई आग ...